‘प्रेरणा’ कार्यक्रम में बच्चों और दिव्यांगजनों के समावेशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अभिभावकों की भूमिका पर चर्चा
बीकानेर। अधिवक्ता संजय रंगा लाइफ फाउंडेशन की ओर से स्वर्गीय संजय रंगा की पुण्य स्मृति में धरणीधर ऑडिटोरियम में ‘प्रेरणा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बच्चों एवं दिव्यांगजनों के समावेशन, उनकी क्षमताओं की पहचान, शिक्षा, स्वास्थ्य, अभिभावकों की भूमिका और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। संस्थान की अध्यक्ष एडवोकेट पारूल रंगा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की अपनी क्षमता और विशेषता होती है। जरूरत उसकी रुचि और क्षमता को समझकर उसे आगे बढ़ने के अवसर देने की है।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। डॉ. हिमांशु भाटिया ने अभिभावकों की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि बच्चों की योग्यता और क्षमता को समझना जरूरी है। किसी समस्या के संकेत मिलने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श और उपचार कराया जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों की दिनचर्या और व्यवहार पर ध्यान देने तथा मोबाइल और टीवी के उपयोग को सीमित करने की बात कही। डॉ. भाटिया ने कहा कि बच्चों को एक समय में एक ही कार्य या निर्देश दिया जाए और उनकी छोटी उपलब्धियों को भी प्रोत्साहित किया जाए। डॉ. पराज सिंघवी ने पढ़ाई के दौरान बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालने की बात कही। उन्होंने बच्चों की क्षमता और सीखने की गति के अनुसार अध्ययन करवाने तथा पढ़ाई को सहज और रुचिकर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिदिन एक पेज पढ़ने जैसी छोटी गतिविधियों से शुरुआत करने और पढ़ाई के बीच पर्याप्त ब्रेक देने का सुझाव दिया। डॉ. श्याम अग्रवाल ने बच्चों की रुचि को सीखने की प्रक्रिया का आधार बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अपनी पसंद थोपने के बजाय उनकी रुचि को पहचानना चाहिए। चित्र बनाने, कहानी सुनाने या खेल जैसी पसंदीदा गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने और अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। डॉ. अमित पुरोहित ने बच्चों एवं दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए तथा अलग-अलग क्षमताओं वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए। संस्थान के सचिव एडवोकेट राकेश रंगा ने कहा कि संस्थान स्वर्गीय संजय रंगा की स्मृति में समाजोपयोगी कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। बच्चों एवं दिव्यांगजनों के लिए अवसर उपलब्ध कराना, उनकी क्षमताओं को स्वीकार करना और उन्हें सम्मान के साथ आगे बढ़ने में सहयोग देना संस्थान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि समावेशी समाज के निर्माण में परिवार, शिक्षक, चिकित्सक और समाज की सामूहिक भूमिका है। बच्चों को उनकी रुचि, क्षमता और आवश्यकता के अनुसार अवसर और सहयोग देकर उनके व्यक्तित्व एवं प्रतिभा का विकास किया जा सकता है।
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